देखने में काफी चटकीले रंगों की होती है। जो कि इन्हें वर्षा वनों में रहने के लिए उपयुक्त बनाता है। और इन्हीं चटक रंगों के कारण इन्हें पेड़ पौधों के बीच छिपने और उनके बीच घुलमिल जाने में बहुत मदद करता है। टोकन पक्षी के पंख काफी छोटे होते हैं जिस कारण से यह लंबी दूरी तय नहीं कर सकते हैं। जिस कारण भोजन के लिए इन्हें छोटी-छोटी उड़ान तय करना पड़ता है।
3. टोकन पक्षी अपने शरीर के तापमान को नियंत्रित करने के लिए अपने चोच पर निर्भर रहता पड़ता है इसलिए सोते समय यह अपने चोंच को अपनी पीठ से सटाकर सो जातें है जिस कारण से रात में इनके शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है।
4. टोकन पक्षी अन्य कई पक्षियों की तरह सर्वाहारी (Omnivorous) होते हैं। परंतु मुख्य रूप से यह वर्षा वनों में लगने वाले फल जैसे अंजीर, संतरा और अमरूद आदि फल खाते हैं। इसके अतिरिक्त यह छोटे जानवरों जैसे कीट पतंगों, छिपकली, अन्य पक्षियों के अंडे और छोटी प्रजातियों के पक्षियों का शिकार भी करते हैं।
5. वर्षा वनों के घटते और जंगलों के कटने से आज यह पक्षी खतरे में है ।और इसके साथ कई अन्य प्रजातियाँ भी खतरे में है। लेकिन आज कई पक्षी प्रेमि इन पक्षियों को पाल रहे हैं और इनका संरक्षण कर रहे हैं।
6. इन पक्षियों की लंबी चोंच इन्हें फलो तक पहुँचने में मदद करती है। और पेड़ों के अंदर गहरे खोखले क्षेत्रों में से यह अपनी चोंच की सहायता से कीड़े मकोड़े पकड़ते हैं। पर इनके
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